शहीदों के आंगन की मिट्टी लाने के लिए एक सितंबर से शुरू होगी शहीद सम्मान यात्रा

उत्तराखंड देहरादून

देहरादून। प्रदेश में सैन्यधाम के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली शहीदों के आंगन की मिट्टी लाने के लिए एक सितंबर से शहीद सम्मान यात्रा शुरू की जाएगी। यह यात्रा चमोली के सवाड एवं पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट से प्रारंभ की जाएगी। सैनिक कल्याण विभाग ने अभी तक प्रदेश के 60 फीसद शहीद परिवारों को चिह्नित किया है। अगस्त तक सभी परिवार चिह्नित कर लिए जाएंगे।

गुरुवार को सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों के साथ सैन्यधाम के निर्माण की तैयारियों के संबंध में वर्चुअल माध्यम से समीक्षा बैठक की। बैठक में एक सितंबर से शुरू होने वाली यात्रा का रूट प्लान भी तय किया गया। बताया गया कि प्रथम विश्वयुद्ध और द्वितीय विश्वयुद्ध से संबंधित शहीदों का रिकार्ड खोजने में काफी मशक्कत की जा रही है। इसके अलावा कई शहीदों के परिवार दूसरे जिलों अथवा राज्यों में चले गए हैं। कई शहीदों का जन्म दूसरे राज्यों का है। ऐसे में इन्हें चिह्नित करने में परेशानी आ रही है। सैनिक कल्याण मंत्री ने सभी परिवारों को जल्द से जल्द चिह्नित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा को लेकर जो भी दिक्कतें आएंगी, उनका संबंधित जिलाधिकारियों के माध्यम से निस्तारण करा लिया जाएगा।

बैठक में इस यात्रा में एनसीसी कैडेट का सहयोग लेने और शहीदों के स्वजन को सम्मान पत्र देने के संबंध में भी सुझाव दिए गए। इस दौरान सैनिक कल्याण मंत्री ने 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियों के निर्देश भी सभी जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों को दिए। बैठक में निदेशक सैनिक कल्याण केबी चंद समेत सभी जिलों के सैनिक कल्याण अधिकारी उपस्थित थे।

कुल 2099 शहीद हुए चिह्नित

बैठक में बताया गया कि अभी तक 2099 शहीद परिवार चिह्नित किए गए हैं। इनमें बागेश्वर में 142, चंपावत में 70, हरिद्वार में 300, नैनीताल में 107, पौड़ी में 170, लैंसडौन में 124, पिथौरागढ़ में 361, ऊधमसिंहनगर में 64, रुद्रप्रयाग में 52, टिहरी में 149, उत्तरकाशी में 09, चमोली में 264 और देहरादून में 279 शहीद चिह्नित किए गए हैं।

 

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