Saturday, February 24, 2024

Uttarakhand: दरकते पहाड़ों से उत्तराखंड-हिमाचल को सबसे अधिक खतरा, GSI की रिपोर्ट में खुलासा; ये राज्य भी DANGER ZONE में

उत्तराखंड

Uttarakhand Latest News उत्तराखंड के भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील हिस्से का 22 प्रतिशत उच्च संवेदनशीलता वाला है। इसी प्रकार से अन्य राज्यों के क्षेत्रों का वर्गीकरण भी किया गया है। डॉ. बहुगुणा ने बताया कि प्रयोग के तौर पर देश के चार जिलों रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) नीलगिरि (तमिलनाडू) और दार्जिलिंग व कलिम्पोंग (बंगाल) में यह कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

HIGHLIGHTS

  1. भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील हिस्से का 22 प्रतिशत उच्च संवेदनशीलता वाला है।
  2. GSI की रिपोर्ट में नीलगिरी और दार्जिलिंग भी शामिल हैं।

 देहरादून। मध्य हिमालयी राज्य अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भूस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। जियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआइ) की ओर से देशभर में कराए गए राष्ट्रीय भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रण के आंकड़े से यह तस्वीर सामने आई है।

कुल 53483 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस राज्य का 39000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील आंका गया है। इस क्षेत्र में वर्ष 2021-22 तक 14780 जगह भूस्खलन हो चुका है। इस दृष्टिकोण से उत्तराखंड देश में तीसरे स्थान पर है, जबकि अरुणाचल प्रदेश पहले और हिमाचल दूसरे स्थान पर है। जीएसआइ के उप महानिदेशक डा. हरीश बहुगुणा द्वारा छठवें विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन में भूस्खलन की स्थिति को लेकर दिए गए प्रस्तुतीकरण में उक्त बातें सामने आईं। इसमें बताया गया कि जीएसआइ ने भूस्खलन की उच्च, मध्यम व न्यून संवेदनशीलता के हिसाब से तहसील स्तर पर क्षेत्र वर्गीकृत किए हैं।

नीलगिरी और दार्जिलिंग भी शामिल

उत्तराखंड के भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील हिस्से का 22 प्रतिशत उच्च संवेदनशीलता वाला है। इसी प्रकार से अन्य राज्यों के क्षेत्रों का वर्गीकरण भी किया गया है। 11 राज्यों में रीजनल लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टमभूस्खलन की चेतावनी जारी करने के लिए जीएसआइ उत्तराखंड समेत 11 राज्यों में रीजनल लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तुतीकरण में डॉ. बहुगुणा ने बताया कि प्रयोग के तौर पर देश के चार जिलों रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड), नीलगिरि (तमिलनाडू) और दार्जिलिंग व कलिम्पोंग (बंगाल) में यह कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

जीएसआइ देगी भूस्खलन की चेतावनी

अगले वर्ष तक चयनित सभी राज्यों में यह सिस्टम आकार ले ले, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। 48 घंटे पहले जारी होंगे बुलेटिनरीजनल लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम के तहत संबंधित राज्यों के भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए 48 घंटे पहले जीएसआइ भूस्खलन की चेतावनी से संबंधित बुलेटिन जारी करेगा। इसके लिए जीएसआइ ने मौसम विभाग से टाइअप किया है। वर्षा का पूर्वानुमान मिलने पर जीएसआइ वर्षा की तीव्रता के हिसाब से भूस्खलन की संभावना के दृष्टिगत बुलेटिन जारी किया जाएगा। इसमें यह भी बताया जाएगा कि किस क्षेत्र में भूस्खलन की उच्च और किसमें मध्यम व निम्न संभावना है।

राज्य और भूस्खलन के स्थान

  • अरुणाचल प्रदेश- 26215
  • हिमाचल प्रदेश- 17102
  • उत्तराखंड-14780
  • जम्मू एवं कश्मीर- 7470
  • मिजोरम- 4221

भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील राज्य क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

  • अरुणाचल प्रदेश 70309
  • हिमाचल प्रदेश 42093
  • लद्दाख 40065
  • उत्तराखंड 39009
  • कनार्टक 31323

यहां विकसित होगा रीजनल लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टमउत्तराखंड, बंगाल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, केरल, सिक्किम, असम, नगालैंड, मिजोरम, मेघालय व कर्नाटक।